डिफॉल्ट

परंपरा

मर्यादा का पालन करिए।
परंपरा से जुड़कर रहिए।।
इतनी नहीं परंपरा भारी।
जिससे हो सकती न यारी।।

परंपरा भी पूँजी होती।
हँसी-खुशी नव पीढ़ी ढोती।।
पर कुछ को ये कब है भाती।
जैसे फटती उनकी छाती।।

परंपरा पुरखों ने डाली।
मान रहे क्यों आप बवाली।।
गहराई में यदि तुम जाओ।
सोच दूर तब उनकी पाओ।।

अनपढ़ उनको कभी न कहना।
परंपरा थी जिनका गहना।
यदि उनका उपहास करोगे।
निश्चित इसका दंड भरोगे।।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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