मुक्तक/दोहा

मुक्तक

छिपे हुये जो भारत में, वह भी बात समझ ले अब,
पाक में घुसकर मारा सबको, तुम्हारी तैयारी अब।
नहीं बचेगा घुसपैठिया कोई, बात यह समझानी है
जिनके शौहर पाकिस्तानी, उनकी बारी आनी अब।

समय रहते बाहर निकल लो, भारत को ख़ाली कर दो,
मौत ढूँढ रही पाक बंगाली, रोहिंग्याओं ख़ाली कर दो।
न अवैध क़ब्ज़े होंगे अब, अवैध नागरिक नहीं बचेंगे,
वक्फ वक्फ का खेल छोड़, ग़द्दारों भारत ख़ाली कर दो।

चली गई सरकार वह, जिसके संरक्षण में पलते थे,
सीमा पर निर्बाध गति से, आवागमन किया करते थे।
राष्ट्रवादियों की सरकार बनी, गुण्डों का दमन शुरू,
वह भी सड़कों पर उतरेंगे, जो कल तक तुमसे डरते थे।

— डॉ अकीर्ति वर्द्धन

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