कविता

साथ

हाथों में तेरा हाथ और अनमोल ये साथ,
तुमने थामा है हमें है पूर्ण तुम पे विश्वास।

यहां ले चलोगे संग तुम्हारे यूँ चल पढ़ूंगी,
कोई भी कभी सवाल मैं न तुमसे करूंगी।

यहां विश्वास होता है वहां डगमगाते नहीं,
खामोशियों को समझकर संग चलते वहीं।

हम सदा मुस्कुराते चले ज़िन्दगी की डगर,
कभी मुश्किलें भी आई तो नहीं है फ़िक्र।

सुख दुख इक दूजे के हम बांटते चलेंगे,
हाथ न छूटे कभी यही ईश से दुआ करेंगे।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

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