मुक्तक/दोहा

दोहा

राह में कांटे बिछा दे, देख फिर तू हौंसला,
तोड़ चाहें घर गिरा दे, देख फिर तू हौंसला ||

आंधियों से, बारिशों से डर नहीं लगता हमें,
खूब तूफां छत उड़ा दे, देख फिर तू हौंसला

डूबती कश्ती किनारे पर लगानी सीख ली,
छेद कश्ती में बना दे, देख फिर तू हौंसला ||

मंजिलों को ढूंढना है रोशनी चाहे न हो,
राह के दीपक बुझा दे, देख फिर तू हौंसला ||

भूमि हो बंजर यदि, तो भी उगा देंगे तरू,
फावड़ा,खुर्पी दिला दे, देख फिर तू हौंसला

— शालिनी शर्मा

शालिनी शर्मा

पिता का नाम-स्वर्गीय मथुरा प्रसाद दीक्षित माता का नाम -श्रीमती ममता दीक्षित पति का नाम-श्री अनिल कुमार शर्मा वर्तमान स्थायी पता- केऐ-16 कर्पूरी पुरम गाजियाबाद फोन न0- 9871631138 जन्म एंव जन्म स्थान-09.04.1969, परीक्षित गढ़ गाजियाबाद उप्र शिक्षा एवं व्यवसाय-बीएससी बीएड़,अध्यापिका व सहायक NCC आफिसर (13 यूपी गर्ल्स बटालियन) प्रकाशित रचनाएं एवं विवरण-अमर उजाला काव्य में 48 रचनायें प्रकाशित, विभिन्न पत्रिकाओं में रोज रजनाएं प्रकाशित होती हैं,दो तीन सम्मान प्राप्त