कविता

नारायणी

नारी हूँ मैं, नर की नारायणी।

बेटी, भगिनी, प्रिया, माँ कल्याणी।।

सक्षम, सशक्त सुशिक्षित सन्नारी।

ममतामयी, धरा-सी धीरज धारी।।

दया, क्षमा, करुणा में मेरा अस्तित्व। 

सृष्टि-सा रमणीक, कोमल कर्तुत्व।।

प्रभु परमात्मा की मैं परम साधिका।।

संसार संरचना में मेरी अहम भूमिका।।

देवी स्वरूपा, जीवन दायिनी माँ।

गंग-सी पावन, मंगला, निर्मला माँ।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८