मुक्तक
तुम जम जम के पानी जैसे लगते हो।
मधुशाला के साकी जैसे लगते हो।
बेमतलब में जब गुस्सा हो जाते हो,
गर्म चाय की प्याली जैसे लगते हो।
— गुंजन अग्रवाल अनहद
तुम जम जम के पानी जैसे लगते हो।
मधुशाला के साकी जैसे लगते हो।
बेमतलब में जब गुस्सा हो जाते हो,
गर्म चाय की प्याली जैसे लगते हो।
— गुंजन अग्रवाल अनहद