लघुकथा

मजबूरी का किस्सा

गाँव निवाई में हर अमावस की रात एक अनजाना-सा डर उतर आता था. कच्ची पगडंडियाँ, घास-फूस के घर और दूर तक फैले खेत, सब कुछ जैसे अचानक रहस्यमय हो उठता. गाँव की चौपाल में अक्सर बुजुर्ग कहते थे कि उस रात पीपल के पेड़ के पास कोई अदृश्य शक्ति घूमती है. बच्चों को सख्त मना था कि अंधेरा होने के बाद घर से बाहर न निकलें.
भले ही मन में लगता है कि यह अंधविश्वास है, पर अक्सर अदृश्य शक्ति का नाम लेते ही बड़े-बड़ों की शक्ति अदृश्य हो जाती है. लेकिन माधो मिट्टी का माधो नहीं था. अदृश्य शक्ति के बहुत-से किस्से उसने सुन रखे थे और उनकी सच्चाई भी! चुप रहकर वह जताता कि सबकी तरह उसे भी डर लगता है, पर वह सच्चाई का पता लगाने के लिए साहस जुटाता रहा. आखिर उसका साहस जीवंत हो ही गया! कमर कस ली उसने अमावस का सच जानने के लिए उस रात पीपल के पेड़ के पास जाने की!
पीपल के पेड़ के पास घास का ढेर रखा था, उसने दूर से ही देखा. जल्दी ही चेहरे को अच्छी तरह ढके किसी न उस पूले में आग लगाई. फक-फक करते पूले की तपन से कोई हाथ ताप रहा था, साथ ही कुछ-कुछ बोलता भी जा रहा था. थोड़ा पास जाकर सुना और आवाज पहचान कर “दीनू काका, नमस्ते” कहा.
“अमावस की रात तुम कैसे यहाँ माधो!” दीनू काका तनिक अचकचा-से गए.
“जैसे आप यहाँ.” माधो की आवाज ठहरी हुई थी.
“मेरी तो मजबूरी है, अमावस की रात वह आती है!”
“वह कौन?”
“तेरी चाची.”
“वह तो कब की जा चुकी हैं!”
“बाकी सबके लिए, मुझसे मिलने की तमन्ना उसे मजबूर कर देती है, मुझे भी!”
“चलो आज मैं भी मिल लेता हूँ.”
“किसी के सामने थोड़े ही न आएगी!”
“आज नहीं आई तो कभी नहीं आएगी.” माधो भी हाथ तापते हुए बोला.
रात बीत रही थी, दीनू काका को लगता कि वह आएगी, पर कोई नहीं आया.
“काका अब घर चलो, उसे लगता होगा कि उसका राज खुल गया है, अब वह कभी नहीं आएगी!
दीनू काका का मजबूरी का किस्सा आम हो गया था, अब न अमावस की रात का भय था, न पीपल के पेड़ का डर.

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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