अहिंसा
अब कहाँ और कितना पलायन करोगे,
कब तलक अहिंसा का पालन करोगे?
राम और कृष्ण ने शांति हेतु अस्त्र उठाए,
कब तलक ग़लत का अनुपालन करोगे?
अहिंसा का अर्थ खुद को मिटाना नहीं होता,
निर्दोष की हत्या पर मुँह छिपाना नहीं होता।
अहिंसा का मतलब है निर्बल को न सताओ,
मौन रहकर हिंसा से नज़रें चुराना नहीं होता।
केवल मार पीट करने को, हिंसा नहीं कहते,
केवल किसी की हत्या को, हिंसा नहीं कहते।
सरहद पर सैनिक रोज़ ही, दुश्मनों को मारते,
आतंकियों को मारने को, हिंसा नहीं कहते।
शाब्दिक हिंसा बहुत ख़तरनाक होती है,
जीते जी इन्सान को, यह मार देती है।
शब्दों के ज़ख़्म दिल पर, दिखते नहीं हैं,
हिंसा की सबसे बड़ी, यह घात होती है।
दुष्ट को मारना, न्याय हित ज़रूरी है,
पापी को प्रताडना, धर्म हित ज़रूरी है।
दुश्मन को मारना, देशभक्ति कहाता,
युद्ध भी, शांति स्थापना हित ज़रूरी है।
— डॉ. अ कीर्तिवर्द्धन
