कविता

पर्यावरण संरक्षण

जरुरत है 
आज संरक्षण की
हम सबके लिए ,
पर्यावरण के
सबको मिलकर 
अपने आप के लिए।

बंद कीजिए 
अब पेड़ काटना 
प्रदूषण फैलाना,
वरना कल 
मांगेंगे भीख हम
अपने जीवन की।

जल-जंगल
जमीन का दोहन 
अब खूब हो रहा,
आज मानव
बड़ा इतरा रहा 
क्या गजब ढा रहा।

जीना चाहते 
तो विचार कीजिए 
पाप मत कीजिए,
कुछ भी नहीं 
बस धरा को अब
खोखला न सिसक रही 
अब रोज धरती 
विरोध भी करती,
क्रोधित होती
तब उत्पात मचाती
गलत क्या करती।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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