धूप छांव
सूरज को रास्ता नहीं मिल रहा
मेरे घर का
चारों ओर से घिर गया मेरा घर
ऊँची ऊँची ईमारतों से
चाँद कभी झाँक लेता था
आधी रात मेरी खुली खिड़की से
रास्ता उसका भी बंद हो गया
मेरे घर तक़ आने का
अब न धूप आ रही
न चांदनी चाँद की
बंद कोठरी में सिमट रह गयी है जिंदगी
अब इस सब के बिना
