रोने पर मरने वाले की बस तलाश में हैं हम
रोया आकाश,
भीगी स्मृतियों में,
चुप है पथ।
सूनी चौखट,
कदमों की आहट,
ढूँढ़े मन।
बुझते दीपक,
धुएँ की लकीरों में,
चेहरा खोया।
टूटी प्रतिध्वनि,
वक्त के गलियारे,
सुनसान हैं।
आँसू बहते,
नाम पुकारते हुए,
हवा थमी।
मिट्टी की गंध,
विछोह की चादर,
ओढ़े धरा।
कौन मिलेगा,
रोने पर मरने वाला,
तलाश शेष।
— डॉ. अशोक
