गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

आज जलवा हम दिखाने लगे।
लोग जी अपना जलाने लगे।।

आँधियाँ जो अब यहाँ चलने लगीं ।
लोग हमको देख धमकाने लगे।।

खुशनुमा माहौल था चलते रहे।
ग़म मिला तो लोग भी जाने लगे।।

जब मुफ़लिसी थी तब लगे बोलने।
अब सुनो मुँह फेर कर जाने लगे।।

बज रही है अब कहीं पर बाँसुरी।
तान के ये बोल ही भाने लगे।।

बात क्या है पूछ ही यह तो लिया।
हम जरा जो आज मुस्काने लगे।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’

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