गीतिका/ग़ज़ल

देश में

हो रहा विस्फोट, जनसंख्या का देश में,
दोहरी नीतियाँ, हैं दोहरे मापदंड देश में।

कब तलक चार शादी, बीस बच्चे सहें,
आतंकी बना रहे, संख्या बढाकर देश में।

लक्ष्य बना, जनसंख्या बढा काबिज रहें,
रोहिंग्या बांग्लादेशी, पालते कुछ देश में।

विश्व भी चिन्तित, जनसंख्या विस्फोट से,
नेता जरा चिंतित नही, भेडियों से देश में।

दिखता नही योगदान, आबादी बढाकर,
मुफ्त रोटी खा फैलाते, अराजकता देश में।

बहुत साधन हैं यहाँ, और संशाधन भी हैं,
जनसंख्या कारण, पडने लगे कम देश में।

एक राष्ट्र एक कानून, संविधान में बताया,
जनसंख्या कानून हो, सबके लिये देश में।

— डॉ. अ कीर्तिवर्धन

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