लघुकथा

लघुकथा – वो छाता

बारिश कह रही थी मानो आज ही बरसना है, सिर्फ एक किलोमीटर दूर मंज़िल.. पर मंज़िल तक जाना ही सबसे बड़ा चैलेंज था।
अचानक छाता लेकर एक अंकल आए.. बेटा काफी देर से देख रहा हूं आपको, बार बार घड़ी और आसमान देख परेशान हो। लो छाता लो और जाओ, डरो नहीं ! जब लगातार तेज़ बारिश होती है तो कुछ पल के लिए धीमी भी होती है। हाँ, छाते की फ़िक्र मत करना,मेरी सामने ही छाते की दुकान है, ये मैं बेच नहीं रहा… ये मेरा अपना छाता है। तुम बेफिक्र जाओ, वापिस लौटाने की ज़रूरत नहीं।
एकपल के लिए लगा कोई सपना है ! धन्यवाद कहा और स्टेशन की ओर भाग निकले। वो छाता उस वक्त बहुत ज़रूरी था, इतनी तेज़ बारिश में स्टेशन पहुंचने की भी हिम्मत पस्त हो रही थी।
वो छाता आज भी संभाल कर रखा है। जब कभी उस शहर जाना हुआ तो वो छाता लौटाना ज़रूर है।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

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