कविता

बाईक पर बंधी इंसानियत

कंधों का धर्म भी सुविधा के दर पे हार गया,
पिता का दुःख “बाईक” का सफ़र बन गया।
वो चार कंधों से सीट पर सिमटकर रह गया,
अंजाने 10 किलोमीटर का सफ़र बन गया।

आज जिसे फूलों की “सेज” नसीब होना थी,
चादर में लिपटी धूसर राहों से गुज़र रही थी।
और सभ्यता की ऊँची इमारतें मौन खड़ी थी,
यहाँ तमाशाइयों की भीड़ नज़र ना आई थी।

यह केवल एक “बेटी” की अंतिम विदाई नहीं,
ये व्यवस्था की संवेदनाओं का जनाज़ा सही।
जहाँ बिन ट्रैफिक़ एम्बुलेंस के पहिए रुक गए,
वहाँ मजबूरी के साये पेड-पौधे भी झुक गए।

इतिहास के पन्नों पर इस दर्द को दर्ज करना,
ताकि आने वाली जेन जी पीढ़ियाँ जान सकें
कि गाइज़ एक दौर ऐसा भी हुआ करता था,
लाश से पूर्व इंसानियत को मरना पड़ता था।

आओ संकल्प लें, अब ऐसी कोई राह न बचे,
जहाँ किसी पिता-भाई,परिवार व पालक को!
अंतिम यात्रा मजबूरी में ऐसे पूरी करना पड़े?
सच्चे संवेदनशील समाज में सभी साथ खड़े।
(संदर्भ – नाबालिग बेटी की लाश बाईक पर ले गए।)

— संजय एम तराणेकर

संजय एम. तराणेकर

जन्म वर्ष 1968 कवि, स्वतंत्र लेखक व टिप्पणीकार। शिक्षा स्नातक एवं गायन में 1986 में विद् किया होकर केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद् द्वारा हिन्दी आषुलिपि प्रतियोगिता में वर्ष 1992 प्रषस्ति-पत्र प्राप्त। विशेष रूचि-बॉलीवुड फिल्में एवं संगीत, पुस्तक समीक्षा एवं राजनीति। मैं मूलतः मध्य प्रदेश के स्वच्छता में हैट्रिक लगा चुके एवं चार बार नंबर वन बनें स्मार्ट सिटी इन्दौर का निवासी हूँ। 1990 के दशक में लेखन में मन रमने लगा और ‘पत्र संपादक के नाम‘ से अपनी प्रारंभिक शुरूआत की। लेखकीय सुकून कितना संतोष देता है, इसकी बात ही कुछ और है। युवा होने पर फिल्मी कलाकारों की तरफ झुकाव ने फिल्मों पर आलेख लिखने की प्रेरणा दी। इसमें मेरी रूचि भी थी। विशेषकर पुराने फिल्मी कलाकारों के जीवन से सम्बंधित आलेखों पर अधिक ध्यान आकर्षित रहा। बावजूद इसके लघु कथा व कविता (बतौर युवा कवि आकाशवाणी इन्दौर में कविता पाठ के भी कई अवसर प्राप्त हुए है।) के अलावा सामयिक, सामाजिक एवं राजनैतिक विषयों पर समय-समय पर अपनी लेखनी को आयाम देने के प्रयास आज भी अनवरत हैं। अब तक विभिन्न समाचार-पत्रों में मुख्य रूप से बॉलीवुड/सिनेमा की साप्ताहिक मेगजीनों में आलेखों एवं पुस्तक समीक्षाओं का प्रकाशन हो चुका है। इनमें ‘लोकमत समाचार-आकर्षण व शो टाईम, राजस्थान पत्रिका-बॉलीवुड, पंजाब केसरी व दैनिक ट्रिब्यून के मनोरंजन, राज एक्सप्रेस-राज सिनेमा, द सी एक्सप्रेस-सी सिनेमा, हरि-भूमि के रंगारंग व रविवार भारती, चौथा संसार के बॉलीवुड, बीपीएन टाईम्स के शो बीपीएन व तरंग, लोकदशा के पर्दा-बेपर्दा व विविधा, नव-भारत एवं स्वतंत्र भारत के अलावा कई स्थानीय समाचार-पत्रों में भी आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। वहीं ‘स्वतंत्र वार्ता एवं डेली हिन्दी मिलाप‘ में कई वर्षो तक नियमित रूप से लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 31, संजय नगर, इन्दौर-452011 मध्य प्रदेश, (वार्ता+वाट्स एप) 98260.25986 ईमेलः s.taranekar@rediffmail.com, Facebook – https://www.facebook.com/Taranekar9

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