गुरु
ज्ञान दीप उज्ज्वल उजियार है गुरु।
वंदनीय, पूजनीय तेजस दिवाकर है गुरु।।
गुरुवर के आशीष से कीर्ति प्रतिष्ठा मिलती,
आत्मविश्वास से यश कलियाँ खिलती।।
पारस से जादूगर हैं गुरु महा ज्ञानी।
लोहे को कुंदन कर दे ऐसे चमत्कारी।।
लुटाते हैं भर-भर वे ज्ञान माणिक-मोती।
मार्गदर्शन से दमकती जीवन ज्योति।।
परम प्रभु से उपकारी हैं गुरु हमारे।
मातु पिता से शुभचिंतक सदा हमारे।।
कोटि कोटि करते वंदन गुरु चरणों में।
मिले मुक्ति पथ गुरुवर की भाव भक्ति में।।
