मुक्तक
मूँद नयन हम स्वप्न देखते चित्र वो ऐसा हो।
खुशबू से महका दे आँगन इत्र वो ऐसा हो।
जिससे खुलकर बात करूंँ मैं अपने अनहद मन की,
बोझ हृदय का बाँट सके जो मित्र वो ऐसा हो।
— गुंजन अग्रवाल अनहद
मूँद नयन हम स्वप्न देखते चित्र वो ऐसा हो।
खुशबू से महका दे आँगन इत्र वो ऐसा हो।
जिससे खुलकर बात करूंँ मैं अपने अनहद मन की,
बोझ हृदय का बाँट सके जो मित्र वो ऐसा हो।
— गुंजन अग्रवाल अनहद