कविता

BA की डिग्री

मेरे पास फोन आया
“भैया, कोई काम दिलवा दो… बहुत परेशान हूँ।”
मैंने पूछा “भाई, आपकी डिग्री क्या है?”
वह बोला “भैया… सिर्फ BA पास हूँ।”
मैंने कहा “अरे! सिर्फ BA क्यों?
एक जमाना था जब BA को
इतनी इज्जत मिलती थी कि
लड़के की डिग्री देखकर रिश्तेदार कहते थे
‘लड़का पढ़ा-लिखा है!’
विवाह के बाजार में तो
BA की डिग्री का जलवा ऐसा था
जैसे आज UPSC की तैयारी कर रहा हो!
लड़की वाले पूछते थे- “क्या पढ़े हैं?”
जवाब आता था- “BA किए हैं।”
और सामने वाले के चेहरे पर
श्रद्धा अपने आप उतर आती थी।
लेकिन जमाना बदला…
आज वही BA बेचारा डिग्री हाथ में लेकर
नौकरी के बाजार के एक कोने में खड़ा है और पूछ रहा है
“भैया… कोई काम हो तो बता देना!”
समय बड़ा बलवान है साहब,
कल तक BA ‘बड़ा आदमी’ था,
आज BA ‘बेरोजगार आदमी’ बनकर घूम रहा है!

— अभिषेक राज शर्मा

अभिषेक कुमार शर्मा

कवि अभिषेक कुमार शर्मा जौनपुर (उप्र०) मो. 8115130965 ईमेल as223107@gmail.com indabhi22@gmail.com

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