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अंतस् की 85वीं मासिक काव्य-गोष्ठी

कौन हो जतन करूं, कौन हो रतन बनूं
जा सै तोरी पगड़ी में जाऊं यूं जड़ी मैं..पूनम माटिया
अंतस् की अनवरत मासिक काव्य-गोष्ठियों की श्रृंखला को बरकरार रखते हुए त्योहारों की और रायपुर, छत्तीसगढ़ कवि सम्मेलन की व्यस्तता के मध्य 85वीं गोष्ठी भी पूर्ण मनोयोग से संपन्न हुई।
वरिष्ठ शिक्षाविद् और फूलों को केंद्र में रखकर अनगिण कविताएं रचने वाली, पुष्प गंधा नाम से जाने जानी वाली डॉ मंजु गुप्ता जी की अध्यक्षता तथा शायर अनिल कपूर जी के मुख्य आतिथ्य में गोष्ठी का सुंदर संयोजन एवं रोचक संचालन अंतस्-अध्यक्ष डॉ पूनम माटिया ने किया। श्रीमती पूजा श्रीवास्तव द्वारा मधुर आवाज़ में श्री भूपेन्द्र राघव जी की सरस्वती वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं ‘दिनकर-मर्मज्ञ’ डॉ दिनेश कुमार शर्मा जी की उपस्थिति ने कवियों का उत्साह वर्धन किया।
डॉ नीलम वर्मा जी, श्रीमती अंशु जैन सहित सभी उत्तम, रसपूर्ण काव्य प्रस्तुति दी।

मद को चकनाचूर कर, प्रेम को विस्तार दे।
कच्चा घट हूं मात अपने हाथ से छू संवार दे।

पूजा श्रीवास्तव (भूपेंद्र राघव)
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सुरमई शाम भी कुछ दिवानी- सी है
तेरी यादों की दिल में रवानी-सी है

ऐ बशर! तू ख़ुद को संभाल, हमारा क्या है
रिश्ते करते हैं सवाल, हमारा क्या है
अनिल कपूर

बहता पानी दरिया है, झरता पानी झरना.. पानी/जल के जीवन-दायिनी तथा जीवन-भक्षक, रूपों पर एक लंबी कविता
डॉ मंजु गुप्ता

बहारों में, नज़ारों में उतर जा
तू ख़ुशबू है फिज़ाओं में बिखर जा
मिलाती जा रही है हां में हां क्यों
कभी ‘पूनम’ तू मन‌ की कर, मुकर जा
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कौन हो जतन करूं, कौन हो रतन बनूं
जा सै तोरी पगड़ी में जाऊं यूं जड़ी मैं..

डॉ पूनम माटिया

हुईं शबनमी जब से तारों की बातें
कोई सुन रहा है वो रातों की बातें
डॉ नीलम वर्मा

डॉ. पूनम माटिया

डॉ. पूनम माटिया दिलशाद गार्डन , दिल्ली https://www.facebook.com/poonam.matia poonam.matia@gmail.com

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