क्षणिका

क्षणिका

गांव का सुनसान प्लेटफार्म,
बरसती बूँदों की छांव,
पटरी पर धीमे-धीमे
गुजरती ट्रेन की थरथर ध्वनि।
आज फिर वही जगह
जहाँ तुम छोड़ गए थे,
और अब भी प्रतीक्षा में हूँ,
कि लौट आओगे कभी…।

— सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com

Leave a Reply