कविता

जीवन का असल मूल्य कैसे पहचानें?

जीवन का असल मूल्य मोह माया से नहीं पहचाना जाता,
यह तो अच्छे कर्मों से हर पल सजाया जाता।
जो बाँट सके प्रेम,वही सच्चा सुख पाता है,
जो परहित में जीए,वही जीवन समझ पाता है।

न ऊँची हवेली जीवन की पहचान बनती है,
न स्वर्ण-मुद्रा से आत्मा कभी महान बनती है।
किसी रोते चेहरे पर मुस्कान जो ला दे,
वही छोटी-सी नेकी जीवन को धन्य बना दे।

बुजुर्गों की सेवा में आशीषों का संसार है,
जरूरतमंद के आँसू पोंछना सच्चा उपकार है।
भूखे को रोटी,प्यासे को पानी दे देना,
यही मानवता है,यही जीवन का गहना।

समय मिले तो किसी के काम आ जाना,
टूटे हुए मन को प्रेम से फिर संभाल जाना।
अहंकार छोड़कर विनम्रता को अपनाना,
और जाते-जाते दुनिया में प्रेम छोड़ जाना।

जब अंतिम सफ़र में सब कुछ यहीं रह जाएगा,
तब केवल कर्मों का दीप साथ जाएगा।
किशन जिस जीवन से किसी का जीवन सँवर जाए,
वही जीवन सच में सार्थक कहलाए।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया

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