गीत – चरणों शीश झुकाता
प्रथम पूज्य की करे अर्चना, रिद्धि-सिद्धि के है दाता ।
दयावंत हे बुद्धि प्रदायक, जन-जन के भाग्य विधाता ।।
प्रथम पूज्य को प्रथम निमंत्रण, नत मस्तक हम आराधे ।
होते सबके काम सफल जब, गणपति आकर सब साधे ।।
रिद्धि-सिद्धी के संग पधारो, शुभ कर्ता सुख के स्वामी ।
शास्त्र रचेता गणपति बप्पा, वेद-शास्त्र के है ज्ञाता ।।
दुख-हर्ता सुख-कर्ता स्वामी, सबका मङ्गल करते हो ।
शम्भू सुत गौरी के नंदन, कष्ट सभी के हरते हो ।।
शूप-कर्ण रक्षार्थ उठाओ, दुख में अब जनता सारी ।
धर्म-धरा पर संकट छाया, धर्म विरोधी हड़काता ।।
गणपति काज सुधारो सबके जीव जगत हो आभारी ।
करे अर्चना पूज्य तुम्हारी, आस-तुम्ही से है भारी ।।
दूर करो सब कष्ट जगत के, हे जग के अंतर्यामी ।
हे प्रथमेश्वर बुद्धि विनायक, मैं चरणों शीश झुकाता ।।
— लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’
