मुक्तक/दोहा

आँखों में विश्वास हो

आँखों में विश्वास हो, चेहरे पर मुस्कान।
ऐसे ही सुंदर बने, रिश्तों जुड़ा जहान॥

आँखों में जब प्रेम हो, मिट जाए हर भेद।
एक नज़र की छाँव में, सूखें मन के खेद॥

आँखों में उम्मीद रख, राह कठिन हो आज।
सपनों को आकार दे, मेहनत का अंदाज॥

आँख बचाकर मत चलो, जग को देखो गौर।
दुखियों के आँसू पढ़ो, मानवता की ओर॥

आँखों में करुणा रहे, मन में रहे प्रकाश।
दुनिया सुंदर हो उठे, मिट जाए अविश्वास॥

आँखों में जो दर्द है, चेहरे पर मुस्कान।
ऐसे कितने लोग हैं, पढ़ न सका इंसान॥

आँखों से पहचानिए, चेहरे के उस पार।
मौन खड़े इंसान में, छिपा हुआ संसार॥

आँखों का पानी कभी, जाने मत दे सूख।
जिसके नयनों में दया, उसके सही रसूख॥

आँखें हों तो देखिए, सौरभ सच्ची प्रीत।
दूजे के दुख को समझ, यही मनुज की रीत॥

नयन रहें संवेदनशील, हृदय रहे निष्काम।
आँखों में इंसानियत, यही जगत का काम॥

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

Leave a Reply