कौन करे उपचार
सुख की खातिर उम्र भर, सहता मन संताप।
मंज़िल फिर भी दूर है, बढ़ता जाता ताप॥
कल के सुख की आस में, आज हुआ बेहाल।
जीवन की इस दौड़ में, बीत गया हर साल॥
सुख पाने की चाह में, दुख को लिया सँवार।
जीवन भर बस खोजता, सुख का सौरभ द्वार॥
सुख की खातिर आदमी, करता नित संघर्ष।
दुख की छाया साथ है, जीवन बना विमर्श॥
दुख से भागे सुख मिले, ऐसी कहाँ मिसाल।
दुख-सुख दोनों साथ हैं, जैसे दिन और रात॥
सुख के पीछे दौड़ते, दुख आया हर बार।
जीवन की इस भूल का, कौन करे उपचार॥
आशा लेकर सुख भरी, दुख सहता हर बार।
समय निकलता जा रहा, सूना मन संसार॥
सुख की चाहत ने दिया, दुख का लंबा साथ।
जीवन भर चलता रहा, खाली लेकर हाथ॥
सुख पाने की लालसा, ढाले मन पर भार।
दुख जितना दबता गया, उतना हुआ अपार॥
सुख की पाने आदमी, दुख से करता प्यार।
जिससे बचना चाहता, वही बने आधार॥
सुख के सपने देखता, दुख में कटती रात।
जीवन की इस राह पर, कौन समझता बात॥
सहते दुख की धूप को, सुख की रखता आस।
जीवन जैसे प्यास में, खोज रहा मधुमास॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
