कविता

खतरनाक खेल

खतरनाक खेल खेला जा रहा है
मानव मानों कठपुतली हो गये हैं,
औरत का रुतबा बाहर से भव्य है,
किंतु मादा से ज्यादा हैसियत नहीं,
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में त्वचा
प्रतिपल संवेदना शून्य हो रही है,
युद्ध में हो रहे सर्वनाश के बारे में
किसीको कोई परवाह ही नहीं है,
प्राकृतिक आपदाओं के बारे में भी
संज्ञान लेने का वक्त किसके पास है?
अब जिंदगी को यंत्र सी कैसे कहेंगे?
यंत्र तो बिगड़कर बंद पड जाता हैन!
आधुनिक युग की संकुचित सोच
समग्र सृष्टि को कहां ढकेल रही है?

— पुष्करराय जोषी

पुष्करराय जोषी

पुष्करराय रेवाशंकर जोषी जन्म स्थल: राजुला (गुजरात) जन्म दिनांक:10/03/1955 शिक्षा:भी.कोम.;बी.एड गुजराती, हिन्दी, अंग्रेजी में लेखन अभी तक दस पुस्तक प्रकाशित गुजराती और हिन्दी पत्रिकाओं में कविता, लघुकथा,लेख प्रकाशित हो रहे हैं। अध्यात्म के यात्री होने से भौतिक प्राप्ति में रुचि नहीं है। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं। पता: 479, गुजरात हाउसिंग बोर्ड, कणकोट पाटिया, कालावड रोड, राजकोट -360005 मो.नं.9925165164

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