सामाजिक

चंचलता कब समाप्त होगी

अपना-अपना कहते -कहते ना जाने कब पराये हो जातें हैं वह। इस संसार समुद्र में डुबती हुई संवेदनशील किश्ती को भला कोई बिना धर्म के कैसे निकालें । योग में श्वास का विशेष महत्व है ।

श्वास आधारित अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम न केवल शरीर को ऊर्जा देते हैं बल्कि मन को भी एकाग्र करते हैं। यह अनुभव सिद्ध है कि जब श्वास लंबी, गहरी और संतुलित होती है , तब विचारों की चंचलता स्वतः ही शांत हो जाती है। दरअसल श्वास ही वह सेतु है, जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का हेतु है । जो श्वास पर अधिकार रखता है वह जीवन की हर चुनौती का सामना किसी न किसी प्रकार से कर सकता है । पतंजलि योग सूत्र कहता है जहाँ श्वास स्थिर हैं वहीं चित्त भी थिर हो जाता है।

एक बहुत मनोरंजक प्रश्न गौतम ने पूछा भगवान् महावीर से – भंते ! जो वीतराग बन गया , अप्रमत्त और अकषाय बन गया , सर्वज्ञ बन गया , सब कुछ जानता हैं, उस केवली ने एक हाथ रखा, आंगन पर । क्या दूसरी बार उसी स्थान पर वह अपना हाथ रख सकता हैं? भगवान् ने कहा नहीं । बड़ी अजीब बात हैं जो आंगन के कण – कण को जानता हैं , अणु- अणु को जानता हैं, केवली से अपने हाथ का एक भी अणु छिपा नहीं है , पहली बार हाथ रखा, दूसरी बार उसी स्थान पर हाथ नहीं रख सकता? कितना अजीब प्रश्न हैं ।
कितना अजीब उत्तर दिया भगवान् ने – नहीं रख सकता । बात समझ में नहीं आई । गौतम ने फिर पूछा भंते! यह कैसे ? केवली कैसे नहीं रख सकता? एक छद्ममस्थ हैं, असर्वज्ञ हैं, अवितराग हैं, जिसमें कषाय हैं, प्रमाद हैं, भूल कर सकता हैं, विस्मृति हो सकती हैं, अज्ञान के कारण उस स्थान का ठीक पता नहीं लगा सकता , पर केवली कैसे नहीं रख सकता ? भगवान् महावीर ने उत्तर दिया – वह जानता तो हैं, पर चंचलता अभी तक समाप्त नहीं हुईं है । शरीर मौजूद हैं । जब तक यह शरीर हैं, शरीर की सूक्ष्मतम क्रियाएं हैं, तब तक चंचलता हैं । शरीर की चंचलता समाप्त नहीं हुई, इसलिए केवली सब कुछ जानता हुआ भी दूसरी बार उसी स्थान पर हाथ नहीं रख सकता हैं । अतः हमारी चंचलता अंतिम समय तक रहती हैं ।

— प्रदीप छाजेड़

प्रदीप छाजेड़

छाजेड़ सदन गणेश डूँगरी गेट के पास सबलपुर रोड़ पोस्ट - बोरावड़ जिला - नागौर राज्य - राजस्थान पिन -341502 नम्बर -9993876631

Leave a Reply