व्यंग्य- डग्गामार यात्रा वृतांत
काशी बोले वाराणसी कौन नही जानता है, पडो़सी जिला से लगा हूं। आना-जाना हमेशा लगा रहता है, कभी साहित्य के कार्य से कभी
Read Moreकाशी बोले वाराणसी कौन नही जानता है, पडो़सी जिला से लगा हूं। आना-जाना हमेशा लगा रहता है, कभी साहित्य के कार्य से कभी
Read Moreसभी को ईमानदारी शब्द सुनकर मन को शांति मिल जाता है, मैं लोकल अखबार में ज्वाइन कर लिया, सोचा पढ़ाई
Read Moreपहले नजर में उन्हे देखा शायर बन गया जी, आग लग मन मेरे हलचल मच गया जी, उनकी नजर में
Read Moreजूते ले लो जोर से चिल्लाता बाजार में जा रहा था, अरे कोई भी ब्रांड चाहियें मुझे बताओ नेताओ, कवियों
Read Moreसुनो पेट में बच्चा है बात पक्का है, कल डाक्टर के पास चलो मैं सेट कर लिया हूं बस कुछ
Read Moreस्कूल के एडमिशन का प्रचार चल रहा था, एडमिशन ले लो 2 पर एक मुफ्त में मेरे यहां सबसे बढिया
Read Moreचौथा स्तंम्भ से हूं विश्वास रखो अभी बहुत ईमानदारी भरा है, जो हर पल सच लिखने की चाहत करता है,
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