ख्वाब अपनी पलकों पे…
ख्वाब अपनी पलकों पे, दिन – रात मैं सजाती हूँ ! देख हँसी लब पे तेरे, मैं पहरों मुस्कुराती हूँ
Read Moreख्वाब अपनी पलकों पे, दिन – रात मैं सजाती हूँ ! देख हँसी लब पे तेरे, मैं पहरों मुस्कुराती हूँ
Read Moreक्यों मिले हो मुझे, जिन्दगी के इस मोड़ पर अपनाना चाहूं मैं… फिर भी तुझे अपना न सकूं !! क्यों
Read More“ये क्या लिखा है तुमने? न सिर है, न पैर। वाह-वाही लूटने के लिए अश्लील शब्दों की भरमार… पता नहीं
Read Moreगुण्डों से बचते-बचाते, इधर से उधर भागते, सुमन अधमरी सी हो गई थी । हिम्मत जबाब देने लगी थी। उसे
Read Moreचुनाव के आसपास होने वाली रैली किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होती । कार्यक्रम से घर लौटे नेताजी बहुत
Read Moreतन्हा दिल की दीवारों पर कुछ परछाइयां मंडराती हैं ! कभी छेड़ें दिल के तारों को, कभी एकाँकी कर जाती
Read Moreदो माता आशीष भाग्य जगे शरण तेरी अहंकार मिटे दर्शन अभिलाषी माँ कृपा बरसे ज्ञान बढ़े समृद्धि बढ़े करे बेड़ा
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