वर्ण पिरामिड – माता रानी
दो माता आशीष भाग्य जगे शरण तेरी अहंकार मिटे दर्शन अभिलाषी माँ कृपा बरसे ज्ञान बढ़े समृद्धि बढ़े करे बेड़ा
Read Moreदो माता आशीष भाग्य जगे शरण तेरी अहंकार मिटे दर्शन अभिलाषी माँ कृपा बरसे ज्ञान बढ़े समृद्धि बढ़े करे बेड़ा
Read Moreडबडबी आँखों से… कृषक निहारे कर दे मेघा तू … अब तो बौछारें कब बरसोगे ? सूखी हैं फसलें… सूखे
Read Moreभ्रष्टाचार के विरोध में नेता जी का अनशन जारी था और भ्र्ष्टाचार से त्रस्त जनता तन-मन-धन से उनके साथ खड़ी
Read Moreचंचल रोमांच से भरपूर इठलाती हिलौरे मारतीं, अनवरत… नदी और नारी जब भी बड़ीं… रोकीं गईं । कभी … बाँध
Read Moreदशानन की तरह.. ओढ़ अनेकानन खुद का अस्तित्व छुपा जाते हो तुम क्या जतलाना चाहते हो ? दिल में छुपा
Read Moreमर्यादा की बेड़ियाँ… तोड़ती सड़ी-गली परम्पराएँ… पीछे छोड़ती । सदियों से बिछे हुए… जाल हटाती तोड़ चक्रव्यू… नये ख्वाब सजाती।
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