चलने की कोशिश कर रहा हूँ
विशाल अंधकार में चलने की कोशिश कर रहा हूँ पथ ऊबड़ – खाबड़ काँटे अनेक घास सूखी – सर्री फैली
Read Moreविशाल अंधकार में चलने की कोशिश कर रहा हूँ पथ ऊबड़ – खाबड़ काँटे अनेक घास सूखी – सर्री फैली
Read Moreअभी अभी स्नानकर निकली है मधुभाषी चिड़िया। रेत पर बैठी सेक रही है पर अपने धूप में, उतावली सी हो
Read Moreसुबह खिली धूप चिड़ियाँ चहकी महका उपवन लहराती घास मन मोहक मौसम। खुशनुमा लोग करते बातें अपनी परायी। घर- घर
Read Moreहे! नववर्ष क्या साथ लाए हो अपने? ढ़ेरों खुशियाँ उपहार, उमंग, अच्छाइयाँ, गर नहीं तो मैं नहीं कहूँगा नववर्ष न
Read Moreमुझे पूरा विश्वास है उस मकान के पीछे आज भी जिंदा होगा नन्हा पौधा जो रोपा था कल परसों मैंने|
Read Moreढली हुयी शाम उतर आयी फिर से, ड़रने लगे बच्चे मगर चाँद ने साहस दिलाया. हथेली पर चाँदनी जगमगाती रोशन
Read Moreआओ मिलकर बात करें देश अपने भारत की शान की, संघर्ष की, वीरों के वलिदान की| नदियों की कल कल
Read Moreये शहर की गलियाँ तंग तानाबाना बुनती भीड़ से भरी कुछ कहना चाहतीं हमसे, पर क्या हम सुनते हैं? लगाते
Read Moreमैं आम इंसान हूँ सादा जिंदगी, दो वक्त की रोटी जुटा पाता हूँ दिहाड़ी मजदूरी करता हूँ परेशानियों से बोलवाला
Read Moreगलियों में उड़ रहे रंग हरे गुलाबी सराबोर नर नारी बच्चे रंग बिरंगे हुड़दंग ही हुड़दंग | कोई रंग भरे
Read More