कविता : सुशासन आएगा
गुस्सा तो मेरे अन्दर बहुत है मगर मैं चुप रहता हूँ ६७ वर्षों में जो दर्द मिले उनको घुट घुट
Read Moreगुस्सा तो मेरे अन्दर बहुत है मगर मैं चुप रहता हूँ ६७ वर्षों में जो दर्द मिले उनको घुट घुट
Read Moreएक दिन स्वप्न में मैं पहुँच गया ऊपर वहां मैंने देखा एक बहुत बड़ा नारी घर वहां पहुँच कर मैं
Read More१. आश्वासनों के गरजते बादलों की हो रही है बरसात चकोर की भांति निहार निहारकर टूट चुकी है आस भ्रष्टाचार
Read More