ग़ज़ल
गलियों में चीखें उभरने न दोगे,करो एक वादा कि मरने न दोगे। ख़ुदा को ख़ुदाई बदलनी पड़ेगी,अगर हौसले को बिखरने
Read Moreओ माई गॉड, पी के, आदिपुरुष के बाद अब ओ माई गॉड-2 आने वाली है। कुछ लोग मनोरंजन करेंगे, कुछ
Read Moreअंतराल चाहे जहाँ भी हो, दिखता तो है ही। चाहे यह एक ही परिवार में दो पीढ़ियों के बीच ही
Read Moreगुवाहाटी। मेलाराम वफ़ा साहित्य अकादमी के तत्वाधान में गुवाहाटी असम साहित्य सभा, ज्योति अग्रवाल हाल में मेलाराम वफ़ा साहित्य अकादमी
Read Moreयाद है मुझे अभी भी ठीक से याद है मुझे यही कोई चार-पाँच साल की रही होगी मेरी उमर मेरे
Read Moreप्रकृति स्वयं में सौम्य सुशोभित, सुन्दर लगती है। देख समय अनुकूल हमेशा, सोती – जगती है ।। जब मानव की
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