Author: *डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

गीत/नवगीत

बासी हवा महकने लगती

खिड़की खुलतीजब अतीत कीबासी हवा महकने लगती। कंचा-गोलीआँख मिचौलीकागज की वह नाव चली।ग्रामोफोनरेडियो बजतेयहाँ वहाँ पर गली- गली।। ऊँची कूदकब्बड्डी

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गीतिका/ग़ज़ल

दोहा-गीतिका – रामनीति ही चाहिए

नर-नारी सुख दुःखमय,विविध रूप संसार।राम सदा रक्षा करें, बरसे प्रेम अपार।। पुरी अयोध्या धाम में,बरसे भक्ति – पीयूष,सरयू की कल-कल

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