दोहा गीतिका
पिता पिता – से एक हैं,अन्य न पिता समान।माँ धरती आकाश वे, संतति के भगवान।। रहते पिता अभाव में, पर
Read Moreपिता पिता – से एक हैं,अन्य न पिता समान।माँ धरती आकाश वे, संतति के भगवान।। रहते पिता अभाव में, पर
Read Moreगुल्लक है धनवान हमारी।लाल -लाल माटी की प्यारी।। बाहर – भीतर नोट भरे हैं।नीले , पीले , लाल , हरे
Read Moreनर-नारी वे धन्य हैं, जिएं सहित अनुराग।आन मान सम्मान का,जागे नवल सुहाग।। जीवन वह जीवन नहीं,बजे फटा ज्यों ढोल,काँव-काँव करता
Read Moreदाना – पानी यहीं मिले सबफिर भी नहीं सुहाए भारत। पौध यहाँ की शूल बन गईजाकर पार देश को धोखाचुभते
Read More‘आकस्मिकता’ एक सौ एक प्रतिशत आकस्मिक है। वह किसी को भी इस बात के लिए संकेत नहीं देती कि वह
Read Moreअपनी मंजिल तक पहुँचाती।सरके नहीं सड़क कहलातीं।। दिन – रातों में चलते राही।यात्रा करें सभी मनचाही।।वहीं पड़ी वह कहीं न
Read Moreइस असार संसार में ऐसा भी बहुत कुछ विद्यमान है , जो ससार है,सारवान है।ऐसे ही सारवानों में एक शब्द
Read Moreसूरज आँखें दिखा रहा हैधरती से नाराज बड़ा। सिमट गई है छाँवपेड़ के पाँव तलेमुरझाए हैं गाँवतपन के दाँव चलेकंकड़
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