व्यंग्य – पहले मैं !
जनता से लेकर नेता तक,चमचा से लेकर भगौना तक,चम्मच से लेकर दौना तक,वाचाल से लेकर मौना तक ‘पहले मैं’ का
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Read Moreबंद किले के नौ दरवाजेदसवाँ बंद सपाट। सब पर बैठे देव- देवियाँअलग सभी के कामसभी सहायक बने परस्परबने हुए नव
Read Moreगया देश को भूल, सत्ता – मद में आदमी।नाशी बुद्धि समूल,कर्म-धर्म करता नहीं।।जन-सेवा से दूर, सत्ता के भूखे सभी।भावहीन भरपूर,
Read Moreगंगा यमुना सरस्वती, प्रियल त्रिवेणी धार।अग-जग को नित तारती,करती जन उपकार।। महाकुंभ मेला लगा, तीरथराज प्रयाग,मन मैला अघ ओघ से,मन
Read Moreजंगल में मंगल कर आएँ।चलो साथियो नाचें – गाएँ।। घनी झाड़ियाँ काँटों वाली।बजा रहीं पत्तों की ताली।।काँटे नहीं कहीं चुभ
Read Moreमैं एक नन्हा – सा मच्छर हूँ।यह आप सब बहुत अच्छी तरह से जानते हैं।जितना ही मैं आपके निकट आता
Read Moreगया बीता हुआ बचपनभुलाया ही नहीं जाता। न भाता था मुझे पढ़नासदा ही मस्त खेलों मेंनहीं स्कूल मैं जाताभ्रमणता खेत
Read Moreशीत बढ़ी भा रही रजाई।मौसम ने अब ली अँगड़ाई।। शी – शी करतीं दादी नानी।नहीं सुहाता शीतल पानी।।दिन में धूप
Read Moreसुबह हो गई है।मोबाइल जाग गए हैं।रात में जो स्वप्न आ रहे थे,वे सब भाग गए हैं।रसोइयों में बर्तनों की
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