ग़ज़ल
अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं, न जाने लोग भी क्या क्या अदाकारी दिखाते हैं लगेगी आग
Read Moreमैं बेटी बनकर आई हूँ खुशियाँ ही खुशियाँ लाई हूँ, जन्मों जन्मों के रिश्तों को, मैं यहाँ निभाने आई हूँ,
Read Moreपिछला पहर जब रात का हो, और आँख में नींद ना आती हो, तुम तनहा छत पर लेटे हो, ये
Read Moreतुम्हें हरदम पुकारा है, मैंने खामोश होकर भी, तुम्हें इक पल नहीं भूला, मैं अपने होश खोकर भी, तुम्हें धड़कन
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