ग़ज़ल
हाल-ए-दिल तुम्हें भी सुनाएंगे किसी रोज़, रोएंगे और तुमको रूलाएंगे किसी रोज़ इज़हार हमें जज़्बों का आता तो नहीं पर,
Read Moreतुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ सिंह की सवार बनकर रंगों की फुहार बनकर पुष्पों की बहार बनकर सुहागन का
Read Moreथोड़ी खुद्दार, थोड़ी खुदमुख्तार है, ये चालीस पार की औरत, लेकिन उसकी खुदमुख्तारी में भी, होता है जिम्मेदारी का एहसास,
Read Moreबिना रीढ़ की हड्डी के किसी आदमी जैसी होती है कट्टरता के बिना देशभक्ति ही कैसी होती है गंगा-जमनी तहजीबों
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