एक व्यंग्य – मेरा ख्याल
आज नहाते नहाते एक ख्याल आया. आपने नोट किया होगा अक्सर यह ख्याल नहाते और पेट साफ करते वक़्त ही
Read Moreआज नहाते नहाते एक ख्याल आया. आपने नोट किया होगा अक्सर यह ख्याल नहाते और पेट साफ करते वक़्त ही
Read Moreभटक रहा हूँ गली गली मोहल्लों में ढूंढ रहा कोई ऐसा घर रहता हो न जिसमें कोई हिन्दू कोई मुस्लिम
Read Moreतू वो लिख जिसे लिखने में लोग संकोच करते हैं जो तेरा दिल कहे तू बस वही लिख तुझे किसका
Read Moreभौतिकता के दौर में सुविधाएं तो सब जोड़ दीं पर बच्चों से माँ की गोद छीन ली पाल रही उनको
Read Moreजिंदगी एक अनबूझ पहेली गूढ रहस्यों से भरी पर्त दर पर्त खुलती न मालूम क्या हो हर अगले पर्त के
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