क्षणिका ब्रह्म *ब्रजेश गुप्ता 10/04/202410/04/2024 मैं ब्रह्म अजर अमर अविनाशी घट घट में व्यापक कहीं नहीं जायूँगा सदा रहूंगा यहीं कहीं आता जाता रहूँगा इक घट से दूजे घट में