Author: *डॉ. दीपक आचार्य

धर्म-संस्कृति-अध्यात्मपर्यावरण

प्रकृति के महिमागान का महापर्व है हरियाली अमावस्या

वर्षा की फुहारों से नहायी धरती, हरियाली की चादर ओढ़े पहाड़ियाँ, कल-कल बहते नदी-नाले, पेड़-पौधों पर पसरी नवजीवन की आभा

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सामाजिक

श्राद्ध और बरसी में पुरखों का महिमागान भी करें

आज के मुकाबले अतीत में हमारे पूर्वज विद्वान, ज्ञानी-विज्ञानी, पराक्रमी और सभी प्रकार के पुरुषार्थों, कलाओं, सांस्कृतिक साहित्यिक विधाओं, प्राच्यविद्याओं

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

फागुनी लोक लहरियों पर थिरक रही हैं अरावली की वादियां

राजस्थान का समूचा वनवासी बहुल दक्षिणांचल वागड़ क्षेत्र होली के रंगों में सराबोर है और सदियों पुरानी आकर्षक परम्पराओं का

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

बुद्धिबेचकों का षड़यंत्र, दुर्जनों का पाखण्ड पर्दा

इतिहास और सत्य में कहीं कोई मिलावट नहीं होती। ये जैसे होते हैं वैसे ही समुदाय के सामने परोसना चाहिए

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