ग़ज़ल
मेरे भीतर कोई खुशबू का बिखर जाता है मुझको उस वक्त उजाला सा नजर आता है सीप की पलकों पे
Read Moreअपने साये से सदा साथ रहे हम ऐसे अपनी धरती पे झुका रहता है अम्बर जैसे चाँद-तारे भी निकल आते
Read Moreमाँ-बाप क्या चले गये बरकत चली गई नफरत चिता में जल गई, उल्फत चली गई मिलता है जो भी पूछने
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