ग़ज़ल – ये घर और पवित्र हुआ
आप हमारे घर आये क्या यह घर और पवित्र हुआ आपने रंग भरे जो इसमें, नक्शा और सचित्र हुआ जीवन
Read Moreआप हमारे घर आये क्या यह घर और पवित्र हुआ आपने रंग भरे जो इसमें, नक्शा और सचित्र हुआ जीवन
Read Moreमैं नींव का पत्थर हूँ मेरा नाम नहीं है रातें हैं मेरे नाम सुबह-शाम नहीं है सदियों से खड़े हैं
Read Moreइस माहौल में गजलें कहना कितना मुश्किल है हर पल तिल-तिल जलते रहना कितना मुश्किल है जिसने पार किया हो
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