गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 23/11/2021 गीत हूँ सुषुप्त ,अंतस में कोई प्रलय दबाये। पीड़ामय यह मौन ,नित्य दीमक सा खाये । पक्षपात का जहर नित्य दम Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 23/11/2021 गीतिका आँसुओं से प्यास मैंने आज फिर बुझाई है। हँस रहा हूँ ,पीर लिए , वक्त तमाशाई है । एंबुलेस जाम Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 25/10/2021 गीत चलों मन ! लौट चले उस ठाँव । जहाँ बसता है मेरा गाँव । जहाँ माटी की सोंधी महक। झींगुरों Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 25/10/2021 गीत जहर के कुछ पेड़ उग आये हैं मेरे चमन में, क्या करूँ मैं ? रोज ही वो घोलतें हैं जहर Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 25/10/2021 गीतिका मौका पाकर जहर दे गये ,क्यों पाले थे नाग ? मुझे हमेशा रही जलाती पछतावे की आग । अगर सो Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 25/08/2021 गीतिका आदमी बुलबुला है पानी का । क्या भरोसा है जिंदगानी का ? गोद में प्यार से शुरू होती , दुःख Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 20/08/2021 गीत द्रोण,भीष्म गर बोले होते , शायद महासमर टल जाता । सोंचो बीच सभा में नारी , दुष्ट दुःशासन खींचे सारी Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 12/08/2021 गीत यहाँ हर तरफ है अनीति पर सच्ची बातें कौन कहे ? द्रुपदसुता निर्वस्त्र हो गई , भीष्म, द्रोण सब मौन Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 20/07/2021 गजल आदमी बनने से जुदा होना । और इंसान का खुदा होना । ऐब यह आदमी में पुश्तों से, मतलबी बनकर Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 09/07/2021 गीतिका बैठ करके हाथ तू! एक दिन मलेगा । झूठ का धंधा तेरा कब तक चलेगा ? चाँद, सूरज, रोज ढलने Read More