गीत/नवगीत

गीत

चलों मन ! लौट चले उस ठाँव ।
जहाँ बसता है मेरा गाँव ।

जहाँ माटी की सोंधी महक।
झींगुरों की रातो की झनक।
लुभाते मन को काले मेघा ,
डराती चपला नभ मे चमक।

जहाँ बलखाती नदिया बीच,
काँपती मछुआरे की नाव ।
चलों मन ! लौट चलें……….

जहाँ है भादौं की बरसात ।
जहाँ है कजरी वाली रात ।
जहाँ धानों के महके खेत,
जहाँ फूले सुंदर जलजात ।

जहाँ चातक स्वाती का मीत ,
जहाँ काले कौवे की काँव ।
चलो मन लौट चले……….

जहाँ कजरारे कारे नैन ।
शहद के जैसे मीठे बैन।
नाग के जैसे काले केश,
चुरा लेते हैं मन का चैन ।

महावर करे धरा को लाल,
जहाँ पर गोरी रखती पाँव ।
चलो मन ! लौट चले……….

*डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

नाम : डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी आत्मज : श्रीमती पूनम देवी तथा श्री सन्तोषी . लाल त्रिपाठी जन्मतिथि : १६ जनवरी १९९१ जन्म स्थान: हेमनापुर मरवट, बहराइच ,उ.प्र. शिक्षा: एम.बी.बी.एस. एम.एस.सर्जरी संप्रति:-वरिष्ठ आवासीय चिकित्सक, जनरल सर्जरी विभाग, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ,फतेहपुर (उ.प्र.) पता. : रूम नं. 33 (द्वितीय तल न्यू मैरिड छात्रावास, हैलट हास्पिटल जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर (उ.प्र.) प्रकाशित पुस्तक - तन्हाई (रुबाई संग्रह) उपाधियाँ एवं सम्मान - १- साहित्य भूषण (साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी ,परियावाँ, प्रतापगढ़ ,उ. प्र.द्वारा ,) २- शब्द श्री (शिव संकल्प साहित्य परिषद ,होशंगाबाद ,म.प्र. द्वारा) ३- श्री गुगनराम सिहाग स्मृति साहित्य सम्मान, भिवानी ,हरियाणा द्वारा ४-अगीत युवा स्वर सम्मान २०१४ अ.भा. अगीत परिषद ,लखनऊ द्वारा ५-' पंडित राम नारायण त्रिपाठी पर्यटक स्मृति नवोदित साहित्यकार सम्मान २०१५, अ.भा.नवोदित साहित्यकार परिषद ,लखनऊ ,द्वारा ६-'साहित्य भूषण' सम्मान साहित्य रंगोली पत्रिका लखीमपुर खीरी द्वारा । ७- 'साहित्य गौरव सम्मान' श्रीमती पुष्पा देवी स्मृति सम्मान समिति बरेली द्वारा । ८-'श्री तुलसी सम्मान 2017' सनातन धर्म परिषद एवं तुलसी शोध संस्थान,मानस नगर लखनऊ द्वारा ' ९- 'जय विजय रचनाकार सम्मान 2019'(गीत विधा) जय विजय पत्रिका (आगरा) द्वारा १०-'उत्तर प्रदेश काव्य श्री सम्मान' विश्व हिंदी रचनाकार

2 thoughts on “गीत

  • *लीला तिवानी

    हमारी राय-
    चलों मन ! चलो की बिंदी हटा दीजिए, मन के बाद , लगाया जा सकता है.
    चलो मन,

  • *लीला तिवानी

    बहुत बढ़िया गीत- ”चलों मन ! लौट चले उस ठाँव ।
    जहाँ बसता है मेरा गाँव ।”

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