ढल गए टल गए
ढल गए टल गए, दिन कहाँ वे रहे,वक्त आया किए और फिर चल वे दिए;दर्द कुछ थे दिए, सर्द कुछ
Read Moreढल गए टल गए, दिन कहाँ वे रहे,वक्त आया किए और फिर चल वे दिए;दर्द कुछ थे दिए, सर्द कुछ
Read Moreप्राण के इस पट रहा मैं,प्राण के उस पाट तुम;त्राण के इस तट रहा मैं,त्राण के उस घाट तुम! मैं
Read More(मधुगीति 250813) विचित्र चित्र तेरी चितवन का,चितेरा तू रहा है त्रिभुवन का;चित्त का अहं औ महत भव का,भाव की हर
Read Moreदीपोत्सव में अवनि पर आज,अनेक प्रदीपों के दर्शन हुए;कितने तरह के दीपकों को,कितने मानव कितनी भाँति जलाए! सुंदर सजी अवलियों
Read Moreजब भी जगत में चलते-चलते आत्म ज्ञान होजाए तो हम द्विज (द्वितीय जन्मे) हो जाते हैं! तब जीवन को नाटक
Read Moreलोक कितने विलोके हम हैं गए,अकेले फिर भी हम हैं कितने रहे;नज़ारे कितने तारे दिखलाए,नज़र कीटाणु कितने गुण आए! चुस्त
Read More(मधुगीति 250812) करोगे क्या यहाँ कला करके,पताका क्या करोगे फहराके;कपोत बनके क्यों न चल लेते,हंस बनके न क्यों विचर लेते!
Read More(मधुगीति 250812) बड़ा अलवेला कन्हैया मेरा,लगाता फेरा भव में हर वेला;आँख तक हर की बाँकपन झाँकी,देता झकझोर भुवन हर झांकी!
Read More(मधुगीति 250812) लूट जो लोगे सभी ले लेगा,लूटने भी कहाँ है वह देगा;साथ में तुम्हारा सभी लेगा,मिटा अस्तित्व तुम्हें हिय
Read More(मधुगीति 250812) दिए भटका कन्हैया भव अपने,जीव लेने लगे हैं निज सपने;गए वे भूल आए क्या करने,भूले वे आए जिसे
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