बिन पंखों की उड़ान
अपने हाथों को फैलाकर, दिन का स्वागत करती हूँ।पंख नहीं दिखते हैं मेरे, किंतु उड़ानें भरती हूँ ।। सूरज ने
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Read Moreकितनी भी मुट्ठी में बंद करना चाहो,कितनी भी मीठी बातों में उलझाना चाहो,कितने भी लालच दे लोकितने भी यत्न कर
Read Moreमैं किताब हूँ,एक खुली किताब!जिसके कुछ शब्दों के अर्थशब्दकोश में नहीं मिलेंगे,दिल की डिक्शनरी खोलनी होगी।कुछ शब्दों कोभावनाओं की तलहटी
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