आह्वान
यह महाप्रलय की बेला है,भूखण्ड वलय की बेला है।साहस की अग्नि परीक्षा है,लय और विलय की बेला है।। बन मृत्यु
Read Moreबेशक तुम को क्षत्राणी की, कोख नहीं मिल पाई होगी।हर ठाकुर की शान देखकर, तन में जलन समाई होगी।। शायद
Read Moreश्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति इंदौर द्वारा गोस्वामी तुलसीदास व मुंशी प्रेमचन्द की जयंती के अवसर पर शिवाजी भवन में
Read Moreतार झंकृत हो रहे हैं ।हम अलंकृत हो रहे हैं ।। आपके बस आगमन से।खिल उठे तन-मन सुमन से।। मस्त
Read Moreनभ को निहार कहती सुनारि सखि! लगातार बरसे बदरा।पहले फुहार फिर धारदार फिर धुआँधार बरसे बदरा।। वय के किशोर चितचोर
Read Moreघनन-घनन घण्टियों की तरह मंच पर कविता घनघना रही थी। बीच-बीच में बड़े घण्टे की ध्वनि सरीखी टन्न की ध्वनि
Read Moreकाव्य-प्रणयन की सामर्थ्य उत्पन्न करने वाले साधनों को ‘काव्य हेतु’ या काव्य का कारण कहा जाता है। ये साधन ही
Read Moreसंस्कृत के आचार्यों ने काव्य के जो लक्षण बताए हैं, वे कविता के लक्षण नहीं हैं। बहुत से साहित्यकार इन्हें
Read Moreनील गगन में रुई सरीखे फाहों के अम्बार लगे।हे अगहन में दिखे मेघ! तुम हिम से लच्छेदार लगे।निर्मल धवल कीर्ति
Read Moreमद्धिम कुहरे की छटा चीर पूरब से आते रश्मिरथी उनके स्वागत में भर उड़ान आकाश भेदते कलरव से खग वंश
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