ग़ज़ल
ज़ह्न भटका ज़रा।हो गया हादसा। भूल शिकवा गिला।कर ज़रा मशवरा। है बहुत हौसला।मत किसी से डरा। जब शुरू है किया।छोड़
Read Moreनूर से उन के जग में उजाला हुआ।ख़ूबसूरत जहां का नज़ारा हुआ। वो ही होता रहा जो भी कहते रहे,रब
Read Moreअटल हमारे अटल तुम्हारे।नहीं रहे अब बीच हमारे।जन जन के थे राज दुलारे।अटल हमारे अटल तुम्हारे। बेबाक रहे बोल चाल
Read Moreबैंकिंग में एआई डेटा विश्लेषण करने, रुझानों और धोखाधड़ी के जोखिमों का पूर्वानुमान करने और ग्राहक सेवा में सुधार करने
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