ग़ज़ल
अमीरे-शहर को तलवार करने वाला हूँ मैं जी-हुज़ूरी से इन्कार करने वाला हूँ कहो अँधेरे से दामन समेट ले अपना
Read Moreखाली कंधों पर थोड़ा सा भार चाहिए बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए जेब में पैसे नहीं हैं डिग्री लिये
Read Moreये वक्त भी गुजर जायेगा। ये पल भी गुजर जायेगा।। सुनहरा पल फिर से आयेगा ।। कुछ दबी हुयी ख्वाहिशें
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