ग़ज़ल
यहां हम डूबने को तैयार, बैठे हैं, वो साहिल पर लिये पतवार, बैठे हैं! हमारे दिल में क्या है कैसे
Read Moreश्वेत, धवल, उजले आंगन पर मैने, इक कलम कुछ स्याही लेकर, अन्तर्मन के अंतर्द्वंद की भावनाऐं उकेरी है, फिर भी
Read Moreदो घडी को पास आओ, हो सके तो, या कभी हमको बुलाओ, हो सके तो! कबसे है रुठा हुआ सा
Read Moreदौड़ आएगी पुकारो, ज़िन्दगी राह में तेरी हज़ारों, ज़िन्दगी! ख़्वाब मेरे आसमां पर जा बसे अब उन्हें नीचे उतारो, ज़िन्दगी!
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