कविता

तुम संग हर बसंत

अनुराग लिप्त,उन्माद राग आर्द्र नयन जोहते बाट। शून्य हृदय की पीड़ा अपार, प्रिय सुन लेते करुण पुकार! उद्विग्न मन और चंचल बयार, कुंजन में बिखरा विरक्ति राग। वसुधा,व्योम और दसों दिशाएं, समझ पीर मेरी, नीर बरसाएं। विस्मृत सारे हास परिहास, सकल सृष्टि लगती उदास। स्वप्न सजीले ओझल सारे, आस में बैठी जगत बिसारे। आघात विरह […]

कविता

अभिलाषा

झुकाकर पलकें कुछ कहा जो मैंने, पढ़ लो प्रिय इन नयनों की भाषा। खामोशी को समझ सको तो, समझो इन अधरों की अभिलाषा। रसमय चुम्बन से तुम अपने, हृदय क्षुधा को तृप्त कर देना। बाहु पाश में अपने लेकर, प्रेम आलिंगन तुम कर लेना। पतझड़,सावन हो या कैसा भी मौसम, रहो विचरते इस मन उपवन […]

कविता

उलाहना

जब भी दुःख हावी हुआ, संवेदना तुमने दिखाई। कृतज्ञता कर व्यक्त अपनी, रस्म हमने भी निभाई। संवेदना का यह प्रदर्शन, महज़ था मन का छलावा। सत्य से अनभिज्ञ रहकर, हो न सकेगा अब गुजारा। जीवन सफ़र की डगर पर, हर पथिक चलता अकेला। दुःख से मेरे तुम दुखी हो, रोक दो यह खोखला दिखावा। क्यों […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कोई राह मिलती नहीं है कहीं तक, जिंदगी की शाम अब ढलने लगी है। हर शख्स हैरान परेशान है दिखता, आईने को भी अब तो फुरसत नहीं है। दगाबाज चेहरों की रौनक तो देखो, वफा की किसी को जरूरत नहीं है। रिश्तों को ज़हरीली मुस्कानों ने घेरा, जज़्बातों की अब कोई कीमत नहीं है। काम […]

कहानी

कहानी – उम्मीद

देश में कोरोना की दूसरी लहर अत्यंत भयावह रूप धारण करती जा रही थी।डबल वेरिएंट वाला वायरस बड़ी निर्ममता व तेजी के साथ लोगों की जीवन लीला समाप्त कर रहा था।इस बार तो उसने बच्चों और युवाओं तक को अपना शिकार बनाने में कोई परहेज नहीं किया।प्रशासन का ढुलमुल रवैया और आम जनता की लापरवाही […]

कविता

चांद और प्रेयसी

व्योम के एक छोर से दूसरे छोर तक, धवल वस्त्र धारण किए, मुखमंडल पर उजास लिए, विचर रहा है तारों के साथ, शुक्ल पक्ष का तन्हा चांद। विरह वेदना से आहत, अनेक रेशमी स्मृतियों को समेटे, विचर रही है छत की मुंडेर पर, एक हताश,उदास तन्हा प्रेयसी। नील गगन का दूधिया चांद, भीड़ में लेकिन […]

कहानी

कहानी – उम्मीद

देश में कोरोना की दूसरी लहर अत्यंत भयावह रूप धारण करती जा रही थी।डबल वेरिएंट वाला वायरस बड़ी निर्ममता व तेजी के साथ लोगों की जीवन लीला समाप्त कर रहा था।इस बार तो उसने बच्चों और युवाओं तक को अपना शिकार बनाने में कोई परहेज नहीं किया।प्रशासन का ढुलमुल रवैया और आम जनता की लापरवाही […]

लघुकथा

चांद से वार्तालाप

कोरोना के बढ़ते प्रकोप से ज़िन्दगी की रफ्तार थम सी गई और लोग अपने घरों की चारदीवारी में कैद हो गए। मोहल्ले के अधिकांश लोग और मेरे घर के निचले हिस्से में रहने वाला परिवार भी इसकी चपेट में आ चुका था सो मेरा डरना स्वाभाविक था।बाहर तो दूर की बात थी मैंने तो नीचे […]

कविता

आखिर क्यों?

बहन, मां, बेटी हो तुम, पत्नी और प्रेयसी हो तुम। तुम ही गीता ,रामायण हो, तुम ही सृष्टि की तारण हो। कितने किरदारों में ढलती हो? फिर क्यों अबला बन फिरती हो तुम सुमन किसी फुलवारी की, तुम जननी किसी किलकारी की। आंचल में ममता की धार है, चुनौतियां भी सभी स्वीकार हैं। फिर क्यों […]

कविता

कड़वा सच (कविता)

छल, कपट, ईर्ष्या, अहम का गर्म बाज़ार है, छद्म वेश धारण किए दिखता हर इंसान है। मुंह पर मीठे बोल,भीतर ही भीतर घात है, कपटी लोगों की अजब गजब सी जात है। शतरंज का खेल खेलते बनते बड़े होशियार हैं, बेबस और लाचार को ठगते,कितने ये मक्कार हैं। तेरे मेरे बीच में जो ये खामोशी […]